Tuesday, November 15, 2016

मेरा हर जवाब ही सवाल बन के रह गया

मेरा हर जवाब ही सवाल बन के रह गया
वो हक़ीक़तों में था, ख़याल बन के रह गया

आज तुझसे दूरियों की  पहली रात थी मगर
ये शब -ए-फ़िराक एक साल बन के रह गया

तर्क़े -ताल्लुक़ात के सलीके  थे, कहाँ गए?
तू भी एक इश्क़ की मिसाल बन के रह गया

बाद ये उड़ान के जो देखा, आसमाँ न था
और ज़मीन भी नहीं .... ये हाल बन के रह गया

Monday, May 2, 2016

Thoughts In noble-silence

Thoughts In noble-silence

द्वन्द्वयुद्ध है अंतर्मन से, अबोल अविचल....कोलाहल
ऐसी नीरवता है जिसमें गूंजे दूर तक कोलाहल

एक ही प्रश्न के शत-शत उत्तर... कौन हूँ मैं?   ...क्या...कोलाहल?
आप ही प्रश्न, आप ही उत्तर, अनंत घेरा ....कोलाहल

एक पुलिंदा कोलाहल का चिंता-जल में बहा आया
शांत समुद्र में घुल गया किन्तु सुप्त, सचेत है....कोलाहल

अब देखा, तूफ़ान उठा था, अब देखा....निश्चल निश्चल
ऊपर ऊपर शीतल शीतल, अन्तरमन में कोलाहल

2 May 2016, Thoughts In noble-silence
Gurgaon
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