क्या होता है कोई स्त्री मन जब भक्ति में झुकता है

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*क्या होता है कोई स्त्री मन जब भक्ति में झुकता है
लिपस्टिक चिपचिप लगती है और काजल भारी लगता है

* जब जब मन करता है तोड़ दूं आज तो सारे बन्धन ही
सामाजिक जीवन है ज़रूरी कह कह मन ही ठगता है

* पेशे में रोबाट^ बना, राहत दी बेकारी भी दी
एक हाथ से दाना छीनूं दूजे पंछी चुगता है

* नींद में जब अवचेतन जागे स्वप्न उसे तुम कहते हो
आँख खुले तो असली जीवन दिवास्वप्न-सा लगता है

*इक वो दिन, बेवफा पे रो-रो तन्हाई को कोसा था
इक ये दिन, जब धम्म-शिविर* दस-दस दिन तनहा रहता है

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(^  --Robotics as my profession)
(*धम्मशिविर : विपश्यना साधना जहाँ 10 दिन अकेले और मौन में रहना पड़ता है)

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...