साधना
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जितना बिस्तर उतनी चादर
सुख दुख सारा एक बराबर

पाप किये बिन सुख का भोग भी
भरता है कर्मों की गागर

सारी रात गुनाह गिनाता
एक ज़मीर-ब-नाम निशाचर

जग सारा मर्कट मन चंचल
इक हनुमान ज्ञान गुण सागर

अंतर्द्वंद्व में हार गया मैं
Yoda जैसा एक बहादर

कविता से कब मोक्ष मिलेगा
रूपम, बैठो ध्यान लगाकर

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...