ग़ज़ल

1. अदाएं, शोख़ी, हँसी लबों पे, गुलों सी खुलती है नाज़नीं पे
निगाह नीची, लबों को भीचे, हया की शबनम भी है जबीं पे
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2.जुदाई का दिन ज़हर-जहर और थी रात जैसे कहर जमीं पे
शिकन-शिकन है रिदा और आंसू निशान सूखे हैं आसतीं पे
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3. वो ख़ाब होगा ख़ुदा ने माथे से नाम उसका मिटा दिया है
उनींद आंखें अभी भी हैं और हैं  सिलवटें भी अभी जबीं पे
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That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...