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2222  2222  2222  222
*क्या होता है कोई स्त्री मन जब भक्ति में झुकता है
लिपस्टिक चिपचिप लगती है और काजल भारी लगता है

* जब जब मन करता है तोड़ दूं आज तो सारे बन्धन ही
सामाजिक जीवन है ज़रूरी कह कह मन ही ठगता है

* पेशे में रोबाट^ बना कर लाभ दिया, बेकारी भी
एक हथेली दाना छीने दूजे पंछी चुगता है

* नींद में जब अवचेतन जागे स्वप्न उसे तुम कहते हो
आँख खुले तो असली जीवन दिवास्वप्न-सा लगता है

* दिल जो कभी बेवफ़ा पे रोता, तन्हाई से डरता था
आज वही दिल धम्मशिविर दस दस दिन तनहा रहता है


•मैं तपता मिट्टी का बर्तन, मुझमें तेल था मिट्टी का
तन कौटुम्बिक और मन मेरा बैरागी होता जाता है
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(^  --Robotics as my profession)
(*धम्मशिविर : विपश्यना साधना जहाँ 10 दिन अकेले और मौन में रहना पड़ता है)

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...