फासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था"
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• ज़िन्दगी! अब दे इजाज़त, क़र्ज़ तेरा भर चुकी
इश्क़ भी मैं, वस्ल भी मैं, हिज्र भी मैं सह चुकी

• राह-उल्फत ले गयी है 'जान' से यूँ 'जाम' तक
तख़्त भी मैं, तर्स भी मैं, तल्ख़ भी मैं तर चुकी

• धूप था वह भाद का, और झील मैं सावन की थी
अक्स भी मैं, अस्ल भी मैं, अश्क भी मैं बन चुकी

• ऐ सितमगर! दे बता अब तो नतीजा इश्क़ का
फ़िक्र भी मैं, अर्ज़ भी मैं, सब्र भी मैं कर चुकी

• कौंध बिजली सी, बनी तूफाँ मैं बरसी, थम चुकी
रश्क भी मैं, रक्स भी मैं, रंज भी मैं कर चुकी

• ऐ ख़ुदा, हक़ चैन का अब बेवफा को हो अता
मर्ज़ भी मैं, दर्द भी मैं, हश्र भी मैं सह चुकी

• तू तसव्वुर, इश्क़ तू, तुझसे मुक़म्मल है ग़ज़ल
हर्फ़ भी मैं, लफ्ज़ भी मैं, वज़्न भी मैं बन चुकी
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ज़िन्दगी! अब दे इजाज़त, क़र्ज़ तेरा भर चुकी
इश्क़ भी मैं, वस्ल भी मैं, हिज्र भी मैं सह चुकी

राह-उल्फत ले गयी है 'जान' से यूँ 'जाम' तक
तख़्त भी मैं, तर्स भी मैं, तल्ख़ भी मैं तर चुकी
(Jaam is bitter, talkh,
Jaan se jaam = takht to talkh = falling top to bottom)

धूप था वह भाद का, और मैं थी सावन झील सी
अक्स भी मैं, अस्ल भी मैं, अश्क भी मैं बन चुकी
(He was like the scorching sun of Bhadrapad. I was like a pond formed in Saavan. In the heat, I have become his reflection aka Aks, shown the truth aka Asl, and was also evaporated to droplets, like अश्क़)

ऐ सितमगर! दे बता अब तो नतीजा इश्क़ का
फ़िक्र भी मैं, अर्ज़ भी मैं, सब्र भी मैं कर चुकी


कौंध बिजली सी, बनी तूफाँ मैं बरसी, थम चुकी
रश्क भी मैं, रक्स भी मैं, रंज भी मैं कर चुकी
(Bijli~ Rashq/jealousy, Toofan/ Storm~~ dance or Raks, rain and silence~ grief, sandness, Ranj)

ऐ ख़ुदा, हक़ चैन का अब बेवफा को हो अता
मर्ज़ भी मैं, दर्द भी मैं, हश्र भी मैं सह चुकी  
(If relief from betrayal is a like healing from disease, then the treatment-pain-affect all have been done, so please grant him the relief)

तू तसव्वुर, इश्क़ तू, तुझसे मुक़म्मल है ग़ज़ल
हर्फ़ भी मैं, लफ्ज़ भी मैं, वज़्न भी मैं बन चुकी

(I have been the words, letters, rules and everything of this Ghazal but it is incomplete because it is only you who completes it)

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...