Paradigm Shift वो खूँखार शेर

=====The Paradigm Shift  ==========
शेरों की दहाड़ गूंज वादी में है
सब हिरनों की जान आज आधी में है
        छौने पर नज़र गड़ी है शेर की इकटक
        माँ का ध्यान भूख, जल, इत्यादि में है
भूख लगे तो वार, है नियम जंगल का
 ये भी एहतिराम उस जिहादी में है
         पहली बार क्रूर को दया आयी है
         पापों का अंत ऐसे ही आदी में है
लौटा जो शिकार बिन गुफा में भूखा
वो खूंखार शेर अब समाधी में है
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That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...