X'mas ग़ज़ल

तमस में आंखें सुलग रही थीं, प्रकोप में दिल जला जला था
उदास आंखें बुझी बुझी थीं, मलाल में दिल धुँआ धुँआ था

हवस की आंखें चढीं हुई थीं, हवास जैसे उड़ा उड़ा था
नज़र पशेमां  झुकी झुकी थी, गुनाह घुटनों गिरा गिरा था
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नज़र सरापा निहारती यूँ बदन हो आबे रवाँ रवाँ सा
नज़र टिकी जा नज़र पे उसकी भँवर में पानी रुका-रुका था
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जुदाई की सालगिरह थी और रंग नाताल (xmas) के सजे थे
लहू-लहू लाल सुर्ख़ यादों से ज़ख्म दिल का हरा हरा था

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...