Friday, January 5, 2018

...वक्त है अभी .... Ishq, Again

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दरमियां शक--वहम का इक दश्त है अभी
शब-ए-सफर! और दिल मेरा, कुछ सख्त है अभी
मेरे ऐतबार तक दूरी हो सिफर ये मुमकिन है
पर तुझसे मुहब्बत होने में ... वक्त है अभी


........... जो किये हैं उनसे ज़्यादा वो करम क्या करे !
.......... और यूँ है तो उस ख़ुदा का .... भरम क्या करे !!
...........मसरूफ ज़िन्दगी थी, तूफाँ से लड़ रहे थे...........कश्ती पलट चुकी थी, अब हम क्या करें !

लहरों पे बहते कश्ती के कुछ तख्त हैं अभी
हाँ, तुझसे मुहब्बत होने में .... वक़्त है अभी



........... इक दिल था इस जगह ....वीरानीयों* से पहले
............ पर जान जा चुकी thhi तेरे मरहमों से पहले
............. पानी का दाग़ वो सूखा आँखों के कोनों पर ठहरा
.............के मौत आई मुझको मेरे आसुओं से पहले

लज़्ज़तें तजरबों की, कमबख्त हैं अभी!
तुझसे भी दिल ये थोड़ा लब-बस्त है अभी
शायद ये कहीं पिघलता, कहीं सख्त है अभी
पर तुझसे मुहब्बत होने में .... वक्त है अभी
हाँ तुझसे मुहब्बत होने में .... वक्त है अभी ... !

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RC
30 July-4 Aug
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RC
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