Monday, May 2, 2016

Thoughts In noble-silence

Thoughts In noble-silence

द्वन्द्वयुद्ध है अंतर्मन से, अबोल अविचल....कोलाहल
ऐसी नीरवता है जिसमें गूंजे दूर तक कोलाहल

एक ही प्रश्न के शत-शत उत्तर... कौन हूँ मैं?   ...क्या...कोलाहल?
आप ही प्रश्न, आप ही उत्तर, अनंत घेरा ....कोलाहल

एक पुलिंदा कोलाहल का चिंता-जल में बहा आया
शांत समुद्र में घुल गया किन्तु सुप्त, सचेत है....कोलाहल

अब देखा, तूफ़ान उठा था, अब देखा....निश्चल निश्चल
ऊपर ऊपर शीतल शीतल, अन्तरमन में कोलाहल

2 May 2016, Thoughts In noble-silence
Gurgaon
Creative Commons License Do not copy!