क्या होता है कोई स्त्री मन जब भक्ति में झुकता है

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*क्या होता है कोई स्त्री मन जब भक्ति में झुकता है
लिपस्टिक चिपचिप लगती है और काजल भारी लगता है

* जब जब मन करता है तोड़ दूं आज तो सारे बन्धन ही
सामाजिक जीवन है ज़रूरी कह कह मन ही ठगता है

* पेशे में रोबाट^ बना, राहत दी बेकारी भी दी
एक हाथ से दाना छीनूं दूजे पंछी चुगता है

* नींद में जब अवचेतन जागे स्वप्न उसे तुम कहते हो
आँख खुले तो असली जीवन दिवास्वप्न-सा लगता है

*इक वो दिन, बेवफा पे रो-रो तन्हाई को कोसा था
इक ये दिन, जब धम्म-शिविर* दस-दस दिन तनहा रहता है

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(^  --Robotics as my profession)
(*धम्मशिविर : विपश्यना साधना जहाँ 10 दिन अकेले और मौन में रहना पड़ता है)

A Robotic's Ballad गाथा

वो उत्कटता, वो अधीर दिल बिस्मिल कहाँ से लाएं?
दिन  रात मशीनों  में  रहकर हम स्माइल कहाँ से लाएं?
जो दिल खुशियों में रोये, ग़म में भी मुस्काता जाए 
....... रोबाट बनाने वाले हम ....वो दिल कहाँ से लाएँ ?

संचालन बुद्धी वाणी अनुभव हैं मशीनों में
सुंदर अवयव, आंखें, भी बेहतर हसीनों से
..... पर हुस्न हया  वो आंखों में झिलमिल कहाँ से लाएं
......उश्शाक़ फ़िदा  हो  ऐसा  काला तिल कहाँ से लाएं ?
....................... रोबाट बनाने वाले हम ....वो दिल कहाँ से लाएँ ?

इंसान जगह अब बदलेगा रोबो  का होगा कब्ज़ा
खामोश नस्ल, रूखी बातें, ना भाव ना ही जज़्बा
बर्बाद ज़माना करने और क़ाबिल कहाँ से लाएं?
इंसान  भला अब इससे भी आदिल कहाँ से लाएं?
....................... रोबाट बनाने वाले हम ...वो दिल कहाँ से लाएँ ?

माँ बाप बहन के रिश्तों में हासिल कहाँ से लाएं?
वो हाथ की रोटी, ममता का मानिल कहाँ से लाएं?
कविता शेरों की महफ़िल .... महफ़िल कहाँ से लाएं?
....................... रोबाट बनाने वाले हम वो दिल कहाँ से लाएँ ?
....................... रोबाट बनाने वाले हम वो दिल कहाँ से लाएँ ?

That Coffee

*‎ नर्म पड़ी थी धूप में सर्दी, गर्म पियाला ... कॉफी का तेरा मेरा सुख दुख बांटे, अपना रिश्ता... कॉफी का! * रूह, ख़ुदा, दिल-विल के मोड़ ...